दिल के तारों को मिला दे साकिया ए साकिया
बीच के पर्दे हटा दे साकिया ए साकिया
बीच के पर्दे हटा दे साकिया ए साकिया
सब तुझे चश्मे मसीहा कह रहे हैं आजकल
मुझको भी थोड़ी शिफ़ा दे साकिया ए साकिया
कब तलक यूं मयकशी में यार उलझा मैं रहूं
जाम नजरों के पिला दे साकिया ए साकिया
रात की हर बात भूली लम्स-ए-लब ही याद बस
फिर लबों से लब मिला दे साकिया ए साकिया
भूल कर उलझन चुभन हर सो सकूं मैं पुरसुकूं
कुछ तो ऐसा गुनगुना दे साकिया ए साकिया
दर्द को दिल में छुपाना, मुस्कुराना, कत्म-ए-अश्क
मुझको भी ये सब सिखा दे साकिया ए साकिया
✍️ डॉ पवन मिश्र