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Monday, 23 January 2023

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जन्मदिवस पर

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जन्मदिवस पर (मनहरण घनाक्षरी)


मां भारती के पुत्र को, धैर्य के समुद्र को।

क्रांतिकारियों के आशुतोष को नमन है।

रण से जो भगा नहीं, क्षण भर डरा नहीं।

ऐसे सिंह शावक के, जोश को नमन है।

एक-एक जोड़कर, जिसने असंख्य किये।

जय हिन्द के उस, घोष को नमन है।

वीरगति पाने वाले, जग में छा जाने वाले।

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को नमन है।।


✍️ डॉ पवन मिश्र

Sunday, 28 August 2016

मनहरण घनाक्षरी- बाढ़

जीवन आधार है जो, सृष्टि के जो मूल में है।
लूटने चला है देखो, धरा के बहार को।।
नभ से बरसता जो, बूँद बूँद अमिय सा।
उसकी ही अतिवृष्टि, सज्ज है संहार को।।
नगर डगर सब, जल में समा गए हैं।
जीवट भी देखो अब, तक रहा हार को।।
काल विकराल बन, रूप महाकाल धर।
लीलने चला है जल, जीवन की धार को।१।

खेत खलिहान सँग, नेत्र भी हैं जलमग्न।
रात बनी काली और, दिन भी हैं स्याह से।।
त्राहि त्राहि कर रहे, जीव जंतु मर रहे।
गुंजित धरा है बस, करुण कराह से।।
आहत हैं नर-नारी, जीवन पे जल भारी।
देखते विभीषिका हैं, कातर निगाह से।।
ईश तेरा ही प्रसाद, बन रहा श्राप अब।
प्रभु करो रक्षा इस, प्रलय प्रवाह से।२।

                         ✍डॉ पवन मिश्र

Saturday, 4 June 2016

मनहरण घनाक्षरी- भारती के मस्तक पे


भारती के मस्तक पे, शोभित मुकुट सा है।
भू के उस स्वर्ग हेतु, शत्रु बेकरार है।।
जा के समझाओ उसे, बात से या लात से कि।
उसकी सारी कोशिशें, तो अब बेकार है।।
ढीढ बन पीठ पर, बार बार वार करे।
शूकरों की फ़ौज का जो, बना सरदार है।।
खुद के हालात किये, बिना लाठी लंगड़े सी।
अपनी दशा का तो वो, खुद जिम्मेदार है।१।

बातें तो वो बड़ी बड़ी, रटता है घड़ी घड़ी।
रोटियों के टुकड़े को, खुद जो लाचार है।।
मांग मांग भरता जो, पेट अमरीका से है।
काश्मीर विजय का वो, रखता विचार है।।
भारतीय शावकों का, सामना करेगा कैसे।
रक्त नहीं नब्ज़ में तो, खौलता अंगार है।।
दुस्साहसी गीदड़ों की, टोलियाँ समक्ष खड़ी।
जिनकी शिराओं में तो, पानी की बहार है।२।

याद है इकहत्तर या भूले कटे हाथ को।
फिर वैसा लक्ष्य तेरे, शीश का लगाएंगे।।
सारे पुत्र भारती के, देख रहे स्वप्न यही।
कब इस्लामाबाद में, ध्वजा फहराएंगे।।
देखो ज्वार जोश के ये, कब तक मौन रहे।
कभी तो ये घटा जैसे, घोर गहराएंगे।।
भड़केगी अग्नि जब, हर गांव कूचे से तो।
देखे दिल्ली वाले इसे, कैसे रोक पाएंगे।३।

                         ✍ डॉ पवन मिश्र
          

Wednesday, 23 September 2015

मनहरण घनाक्षरी छन्द- वन्दे मातरम्


गीत है यह प्राण का विजय के प्रमाण का।
भारतीय मान का ये गान वन्दे मातरम् ।।

क्रान्तिकारियों की शान देश का नव विहान।
आश की किरण का ये गान वन्दे मातरम्।।

जो शोषितों को मान दे औ निर्बलों को प्राण दे।
ऐसा देवताओं सा ये गान वन्दे मातरम्।।

कोई शस्त्र हो समक्ष चाहे मृत्यु हो प्रत्यक्ष।
श्वास फिर भी गाये ये गान वन्दे मातरम् ।।

                                  -डॉ पवन मिश्र

मनहरण घनाक्षरी छन्द- आठ, आठ, आठ, सात पर यति वाला वार्णिक छन्द।