ये हम इक़रार करते हैं सरे बाज़ार करते हैं
तुम्ही से प्यार करते हैं तुम्ही से प्यार करते हैं
तुम्ही से प्यार करते हैं तुम्ही से प्यार करते हैं
मुहब्बत है अगर इक आग का दरिया तो होने दो
हमारे साथ आओ आज दरिया पार करते हैं
बहुत चैन-ओ-सुकूं से रहना वहना हो गया साहब
चलो अब इश्क़ में ये ज़िंदगी बेज़ार करते हैं
जरूरत हो हमारी तुम तुम्हारे बिन नहीं जीवन
तुम्हारे साथ अपने स्वप्न हम साकार करते हैं
चमन में खाद पानी पा जो बढ़ती जा रहीं प्रतिदिन
चलो उन जंगली बेलों का कुछ उपचार करते हैं
चलो उन जंगली बेलों का कुछ उपचार करते हैं
पवन क्या लोग दुनिया में कभी ये सोचते होंगे
किसी के साथ आख़िर क्यों बुरा व्यवहार करते हैं
✍️ डॉ पवन मिश्र
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