Showing posts with label प्रमाणिका छन्द. Show all posts
Showing posts with label प्रमाणिका छन्द. Show all posts

Thursday, 28 April 2016

प्रमाणिका छन्द- जगो सपूत भूमि के


जगो सपूत भूमि के,
उठो कि शस्त्र चूमि के।

पुकारती तुझे धरा,
कि घाव है अभी हरा।

प्रहार वक्ष पे सहो,
अजेय भाव में बहो।

करो विनाश पाप का,
कि राष्ट्र धर्म आपका।

 ✍डॉ पवन मिश्र



Sunday, 27 September 2015

प्रमाणिका छन्द- चलो चले प्रकाश में

~प्रमाणिका छन्द~

चलो चले प्रकाश में।
नवीन दृश्य आश में।।

निशा प्रमाण खो गया।
नया विहान हो गया।।

लता खिली बहार से।
गुलों समेत प्यार से।।

प्रभो सुनो पुकार है।
यही सदा विचार है।।

न द्वेष हो कभी यहां।
न क्लेश हो कभी यहां।।

रहें सभी लगाव से।
बढ़े चले प्रभाव से।।

घनी भले निशा मिले।
निराश भाव ना खिले।।

प्रकाश पुंज संपदा।
दिया जला रहे सदा।।

     -डॉ पवन मिश्र

शिल्प- लघु गुरु की चार आवृत्ति (1 2×4)