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Sunday, 10 January 2016

सार छन्द- राजनीति की बातें


सुन लो भैया सुन लो भैया, राजनीति की बातें।
बातों की ही खाते हैं सब, बातें ही दिन रातें।१।

सुन लो भैया सुन लो भैया, ऊ है बड़का नेता।
मुख में राम बगल में छूरी, जो अपने रख लेता।२।

सुन लो भैया सुन लो भैया, इनकी कारस्तानी।
करना-धरना कुछौ नहीं बस, जारी जंग जुबानी।३।

सुन लो भैया सुन लो भैया, सब मौसेरे भाई।
माल बाँट के आपस में सब, ढोंगी करे लड़ाई।४।

सुन लो भैया सुन लो भैया, पैसा के ये लोभी।
पल भर में ईमान बेच दें, दाम मिले बस जो भी।५।

सुन लो भैया सुन लो भैया, ये मेढ़क बरसाती।
इनकी बारिश बड़ी अनोखी, पांच साल में आती।६।

सुन लो भैया सुन लो भैया, ईश्वर दया दिखाये।
सन्मति इनको आ जाये तो, देश स्वर्ग बन जाये।७।

                                        -डॉ पवन मिश्र

शिल्प- 16,14 मात्राओं पर यति तथा पदांत में दो गुरु।






Thursday, 31 December 2015

सार छन्द/ छन्न पकैया- सर्द गर्म मौसम


छन्न पकैया छन्न पकैया, मौसम करवट लेता।
कभी सर्द तो कभी गर्म है, जैसे कोई नेता।।

छन्न पकैया छन्न पकैया, मौसम है अनजाना।
इस सर्द गरम में सम्भव है, खाँसी का लग जाना।

छन्न पकैया छन्न पकैया, मौसम सब पर भारी।
कभी ठण्ड तो कभी गरम से, व्याकुल हैं नर नारी।।

छन्न पकैया छन्न पकैया, कैसा मौसम फेरा।
दिन में रवि का ताप चढ़े है, फिर हो शीतल डेरा।।

छन्न पकैया छन्न पकैया, ये कैसी है सर्दी ।
पूष मास में भी ना निकली, मोटी वाली वर्दी।।

छन्न पकैया छन्न पकैया, क्यूँ ना सर्दी आती।
हिम गिरने की बेला में क्यूँ, रंगत धूप दिखाती।।

छन्न पकैया छन्न पकैया, तय कर लो अब प्रभु जी।
दूर करो ये लुका छिपी अब, मानो मेरी अरजी।।

छन्न पकैया छन्न पकैया, मानो प्रभु हैं कहते।
पेड़ काट डाले है तुमने, जिनसे मौसम रहते।।

                              - डॉ पवन मिश्र

शिल्प- 16,12 मात्राओं पर यति तथा चरणान्तक २२ या २११ या ११२ या ११११ से होना चाहिए।