Showing posts with label भुजंगप्रयात छन्द. Show all posts
Showing posts with label भुजंगप्रयात छन्द. Show all posts

Thursday, 30 June 2016

भुजंगप्रयात छन्द- भजूं मैं कन्हैया


भजूं मैं कन्हैया वही नाथ मेरा।
वही शाम मेरी वही है सवेरा।।
धरा है उसी की सितारे उसी के।
नदी धार में वो किनारे उसी के।१।

वही राधिका का वही गोपियों का।
वही प्रेमियों का वही योगियों का।।
सुनो द्वारिकाधीश तेरा सुदामा।
पुकारे तुम्हें, हे सुनो नाथ श्यामा।२।

                       ✍डॉ पवन मिश्र

शिल्प- चार यगण (१२२*४)

Thursday, 9 June 2016

भुजंगप्रयात छन्द- जपो नाम कान्हा


जपो नाम कान्हा वही है सहारा।
वही तारता है वही है किनारा।।
करे धर्म रक्षा वही मोक्षदाता।
सुनो विश्व का है वही तो विधाता।१।

उसी के सहारे धरा बोझ ढोती।
उसी की कृपा दृष्टि सर्वत्र होती।।
हमारी कन्हैया यही प्रार्थना है।
न कोई दुखी हो यही याचना है।२।

             ✍ डॉ पवन मिश्र

Thursday, 2 June 2016

भुजंगप्रयात छन्द- दिलों में सदा

दिलों में सदा प्रेम ही हो हमारे।
डिगे ना कभी पाँव देखो तुम्हारे।।
भले सामने हो घना सा अँधेरा।
निराशा न थामो मिलेगा सवेरा।१।

हमेशा चलो सत्य की राह पे ही।।
जलाओ दिए नेह के नेह से ही।।
चलो आज सौगन्ध लेके कहेंगे।
सदा दूसरों की भलाई करेंगे।२।

             ✍डॉ पवन मिश्र

शिल्प- यगण की चार आवृत्ति (१२२*४)