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Wednesday, 13 July 2016

चौपाई- अद्भुत छवि मनमोहन जी की


अद्भुत छवि मनमोहन जी की,
करहुँ आरती सोहन जी की।
लाल अधर पर मुरली साजे,
कानन कुण्डल सहित विराजे।१।

पुष्प माल वक्षस्थल शोभे,
मोर मुकुट मस्तक पर लोभे।
मृगनैनन में काजल रेखा,
अप्रतिम ऐसा रूप न देखा।२।

पीत तिलक अति सुंदर लागे,
हर्षित गोप वृन्द बड़ भागे।
चक्र सुदर्शन कर में धारे,
मातु यशोदा रूप निहारे।३।

कनक समान देह अति मोहे,
मन्द हँसी मुखड़े पर सोहे।
हाथ जोड़ सब खड़े दुआरे
क्लेश हरो हे नन्द दुलारे।४।

               ✍डॉ पवन मिश्र


Wednesday, 18 May 2016

चौपाई- दधि सपरेटा


आज सुनायें एक कहानी।
बड़ी घमण्डी थी इक रानी।।

उस रानी का ऐसा बेटा।
जैसे मानो दधि सपरेटा।।

हरदम रटता माई माई।
उस पप्पू को अकल न आई।।

उसका इक मौसेरा भाई।
जिसको रानी सोन्या लाई।।

दिन भर ढूंढे नये बहाने।
लगे रायता वो फ़ैलाने।।

मोदी ही है नाव खिवैया।
अच्छे दिन आयेंगे भैया।।

        ✍ डॉ पवन मिश्र

Saturday, 26 December 2015

चौपाई- प्रात भई खग चहकन लागे


प्रात भई खग चहकन लागे,
घर आँगन भी महकन लागे।।
निशा गयी फैला उजियारा,
कुसुमालय सा है जग सारा।।

शीतल मन्द पवन भी आयी,
हर बगिया हरियाली छायी।
ईश विनय में शीश झुकाऊँ,
कृपा दृष्टि आजीवन पाऊँ।।

गुरु चरणों में वन्दन अर्पित,
क्या मैं दूँ सर्वस्व समर्पित।
मात-पिता का प्रभु सम आदर,
जीवन अर्पण उनको सादर।।

यह मिट्टी तो जैसे चन्दन,
देश-प्रेम से महके तन मन।
इसकी ख़ातिर बलि बलि जाऊँ,
जन्म पुनः भारत में पाऊँ।।

              -डॉ पवन मिश्र